Thursday, 25 May 2017

WHAT IS JANAM NAKSHATRA AND ROLE OF PANCHA PAKSHI

FIVE BIRDS MEANS PANCHA PAKSHI :-All human beings are categorise under five birds:-
1. VULTURE
2. OWL
3. CROW
4.COCK
5. PEACOCK
          This is fixed and is based on our birth star.They are five activities every day i.e Eating, Walking, Ruling, Sleeping and dying.
          Every day is divided into five divisions 2 hours 24 minutes = Yamas =Yamas and night.
         These functional patterns vary, during waxing and waning Moon cycles and during the week days.
         

Wednesday, 11 February 2015

केतु

     केतु :- यह ग्रह गुप्त विधा का कारक है मोक्ष, कठिन कार्य, नाना, दुःख- पीड़ा, गुप्त तंत्र विधा और मंत्र शक्ति यह तमोगुणी वर्णसंकर जाती का अशुभ ग्रह हैं इसके द्वारा विष, ज्वर, नाना- नानी, कम्बल, कलह शस्त्रादि, चर्मरोग, गुप्त षड्यंत्रादि, स्नायु रोग के बारे जाता है । यह धनु राशि में उच्च का होता है ।

--केतु एक गर्म ग्रह है और मंगल के जैसा है l केतु बृहस्पती के मित्र है और बुध ग्रह के शत्रु है l चंद्रमा और मंगल के साथ सम है l केतु जीव के द्धारा पापो के अशुभ प्रभावों को निरस्त करने की ज्ञान और विधि देता है l केतु जीव को विरक्ति और मोक्ष प्राप्त करने सहायक होते हैं l केतु उत्तर - पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं l केतु के अधिदेवता गणपति , भैरव जी है l मोक्ष, उन्माद, कारावास, विदेशी भूमि में जीवन, जहरीली भाषा, तुनक मिजाज, लम्बा कद, शरीर पर दाग, साजिश, दुर्भावपूर्ण, दर्शन शास्त्र, अलौकिक शक्ति, कीड़ों से होने वाले रोग, धर्म नीति, ज्योतिष शास्त्र ज्ञान प्राप्त होता हैं l कार्य क्षेत्र खाल और चमड़े व्यवसाय, हड्डियो, बूचड़खाना, शवगृह, औषधि का व्यापारी, धर्म उपदेशक, चिकित्सक, आलौकिक विद्या, शास्त्र ज्ञान और भूखंडमापक हो सकते है ll तिल्ली का बढ़ना, मोतियाबिंद, फेफड़ों के रोग, शरीर दर्द, महामारी, कुछ रोग जिनको पहचानें  न जा सके, चर्म रोग, पांव में जलन, आत्महत्या, शरीर झुआंझुनाहट होना रोगों होने की संभावना बन रहती है l

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Tuesday, 27 January 2015

राहु

राहु :- यह एक छायाँ ग्रह है तथा दक्षिण- पशिचम दिशा का स्वामी है। कृष्ण वर्ण तथा पाप ग्रह और वायु तत्व प्रधान, तीक्ष्ण बुद्धि ग्रह है । राहु दादा का कारक, कठोर वाणी, विदेश यात्रा, गुप्त धन का घोतक व मिथुन राशि में उच्च, कन्या राशि स्वराशि तथा धनु राशि में नीच है । भूत बाधा,शराब, विज्ञानं, जासूसी आकसिमक घटना का कारक, वैधव्य व नील-वस्त्र आदि भी जानने जाते है ।

Tuesday, 20 January 2015

शनि

नि :-     इनको सूर्य पुत्र कहते है यह मन्द, काले रंग, सख्त बाल, अड़ियल व प्रचंड ग्रह है । यह पशिचम दिशा और शिशिर ऋतु के स्वामी,चतुष्पद,तमोगुणी कफ व वायु प्रकृति प्रधान ग्रह है । कर्मो का हिसाब करने वाले,शूद्र वर्ण व नपुंसक तथा पापी ग्रह माने जाते है । शनि की स्वराशि मकर व कुम्भ तथा इन राशियों के स्वामी भी है, कुम्भ मूलत्रिकोण तथा तुला के 20 अंश पर उच्च राशि के और मेष में 20 अंश पर नीच के होते है तथा कृष्ण-पक्ष में एंव राश्यन्त में वक्री शनि बलवान होते है । सप्तम भाव व स्वद्रेष्काण व दक्षिणायन में बली माने जाते है|          



                     शनि आयु,सेवक, मृत्यु, दुःख, विपत्ति और रोग के कारक माने जाते है तथा लोहा, लोभ, सन्यास,मोह, रहस्य, राजदंड और कारोबार में हानि, दुर्घटना, विश्वासघात, कानून पर विचार किया जाता है । मदिरा, तिल ,काले वस्त्र, तेल, शल्य चिकित्सा व ऋण और कर्मचारी वर्ग आदि । शनि का विशेष फल 36 वर्ष से 45 वर्ष के मध्य में मिलता है ।  

Wednesday, 14 January 2015

शुक्र

  
   शुक्र :-
         यह ग्रह प्रेम, सौंदर्य, एवं आकर्षण का प्रतीक है । यह शुभ ग्रह, जलीय तत्व, आग्नेय दिशा का स्वामी है । यह एक स्त्री ग्रह, मध्यम आकार,रजोगुणी व मधुर स्वभाव और किशोर आयु व ब्राह्मण जाति वाला ग्रह है । यह मीन राशि में उच्च का और कन्या राशि में नीच का है । यह वृष व तुला राशि का स्वामी है 
            ऎन्द्रिय आनन्द का स्वामी है, जीवन शक्ति भी है । वह वाहनों, व्यापार और कैमिकलो, दवाईयो, सिल्क व सूती कपड़े का प्रतीक है तथा वाध-यन्त्रों, इत्र, सैक्स सबंधी अंग का कारक भी है ।          बीमारियाँ का घोतक भी है :- गठिया व नजर संबंधी कमजोर होना, सुंघने की शक्ति कम होना व श्वेत प्रदर  होता है ।

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गुरु

       गुरु :-
        गुरु एक सतोगुणी ग्रह है पुरुष जाति, व ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है पुत्र का कारक है । ईशान कोण का स्वामी , धर्म-नीति का पंड़ित, इसकी कफ प्रकृति व ब्राह्मण जाति और परमार्थी ग्रह है ।
                    यह धनु व मीन राशि का स्वामी और कर्क में उच्च का मीन राशि में नीच होता है । यदि स्वयं व उच्च राशि का होकर लग्न स्थित हो महापुरुष योग बनता है ऐसा जातक सौभाग्यशाली, आदर्शवादी व कभी न हारनेवाला और बड़े -बड़े
 कार्य करके सब को सम्मोहित करनेवाला होता है । 
                            ऐसे जातक को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता और दिशाबली होकर पुर्वजन्म के पुण्य कर्मो से अपने भाग्य भाव दृष्ट करता है । यदि निर्बली बृहस्पति जातक को आडमंबर रचनेवाला व ज्यादा बाते करनेवाला, उत्साह व ऊर्जा की पाई जाती है ।
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Wednesday, 7 January 2015

बुध

बुध :-
         बुध ग्रह मण्डल का सबसे छोटा व युवा और राजकुमार ग्रह है । यह वाणी, बुद्दि ,शिक्षा, मित्र और मामा का कारक है और इसके द्वारा ज्योतिष विधा,चिकत्सा, कानून,व्यवसाय, लेखन और वाक़ मासी,मामी ,चाची और वात -कफ-पित, रजोगुणी, पृथ्वी तत्व
   अच्छा अच्छा बुध भाषाओं में प्रवीण और शब्दकोष में दक्षता देता है । अच्छी प्रवचन,वार्तालाप, लेखक, सम्मोहित करने वाला और दोहरा व्यवहार में दक्ष होता है अच्छा बुध धार्मिक कार्य करने में होता है । 



निर्बल बुध :- इच्छाशक्ति की कमी, बेईमान व वाकशक्ति में त्रुटि व नाड़ी तन्तु का रोग सम्भव है ।

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