शनि :- इनको सूर्य पुत्र कहते है यह मन्द, काले रंग, सख्त बाल, अड़ियल व प्रचंड ग्रह है । यह पशिचम दिशा और शिशिर ऋतु के स्वामी,चतुष्पद,तमोगुणी कफ व वायु प्रकृति प्रधान ग्रह है । कर्मो का हिसाब करने वाले,शूद्र वर्ण व नपुंसक तथा पापी ग्रह माने जाते है । शनि की स्वराशि मकर व कुम्भ तथा इन राशियों के स्वामी भी है, कुम्भ मूलत्रिकोण तथा तुला के 20 अंश पर उच्च राशि के और मेष में 20 अंश पर नीच के होते है तथा कृष्ण-पक्ष में एंव राश्यन्त में वक्री शनि बलवान होते है । सप्तम भाव व स्वद्रेष्काण व दक्षिणायन में बली माने जाते है|
शनि आयु,सेवक, मृत्यु, दुःख, विपत्ति और रोग के कारक माने जाते है तथा लोहा, लोभ, सन्यास,मोह, रहस्य, राजदंड और कारोबार में हानि, दुर्घटना, विश्वासघात, कानून पर विचार किया जाता है । मदिरा, तिल ,काले वस्त्र, तेल, शल्य चिकित्सा व ऋण और कर्मचारी वर्ग आदि । शनि का विशेष फल 36 वर्ष से 45 वर्ष के मध्य में मिलता है ।
शनि आयु,सेवक, मृत्यु, दुःख, विपत्ति और रोग के कारक माने जाते है तथा लोहा, लोभ, सन्यास,मोह, रहस्य, राजदंड और कारोबार में हानि, दुर्घटना, विश्वासघात, कानून पर विचार किया जाता है । मदिरा, तिल ,काले वस्त्र, तेल, शल्य चिकित्सा व ऋण और कर्मचारी वर्ग आदि । शनि का विशेष फल 36 वर्ष से 45 वर्ष के मध्य में मिलता है ।

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