Wednesday, 11 February 2015

केतु

     केतु :- यह ग्रह गुप्त विधा का कारक है मोक्ष, कठिन कार्य, नाना, दुःख- पीड़ा, गुप्त तंत्र विधा और मंत्र शक्ति यह तमोगुणी वर्णसंकर जाती का अशुभ ग्रह हैं इसके द्वारा विष, ज्वर, नाना- नानी, कम्बल, कलह शस्त्रादि, चर्मरोग, गुप्त षड्यंत्रादि, स्नायु रोग के बारे जाता है । यह धनु राशि में उच्च का होता है ।

--केतु एक गर्म ग्रह है और मंगल के जैसा है l केतु बृहस्पती के मित्र है और बुध ग्रह के शत्रु है l चंद्रमा और मंगल के साथ सम है l केतु जीव के द्धारा पापो के अशुभ प्रभावों को निरस्त करने की ज्ञान और विधि देता है l केतु जीव को विरक्ति और मोक्ष प्राप्त करने सहायक होते हैं l केतु उत्तर - पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं l केतु के अधिदेवता गणपति , भैरव जी है l मोक्ष, उन्माद, कारावास, विदेशी भूमि में जीवन, जहरीली भाषा, तुनक मिजाज, लम्बा कद, शरीर पर दाग, साजिश, दुर्भावपूर्ण, दर्शन शास्त्र, अलौकिक शक्ति, कीड़ों से होने वाले रोग, धर्म नीति, ज्योतिष शास्त्र ज्ञान प्राप्त होता हैं l कार्य क्षेत्र खाल और चमड़े व्यवसाय, हड्डियो, बूचड़खाना, शवगृह, औषधि का व्यापारी, धर्म उपदेशक, चिकित्सक, आलौकिक विद्या, शास्त्र ज्ञान और भूखंडमापक हो सकते है ll तिल्ली का बढ़ना, मोतियाबिंद, फेफड़ों के रोग, शरीर दर्द, महामारी, कुछ रोग जिनको पहचानें  न जा सके, चर्म रोग, पांव में जलन, आत्महत्या, शरीर झुआंझुनाहट होना रोगों होने की संभावना बन रहती है l

--

No comments:

Post a Comment