गुरु एक सतोगुणी ग्रह है पुरुष जाति, व ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक है पुत्र का कारक है । ईशान कोण का स्वामी , धर्म-नीति का पंड़ित, इसकी कफ प्रकृति व ब्राह्मण जाति और परमार्थी ग्रह है ।
यह धनु व मीन राशि का स्वामी और कर्क में उच्च का मीन राशि में नीच होता है । यदि स्वयं व उच्च राशि का होकर लग्न स्थित हो महापुरुष योग बनता है ऐसा जातक सौभाग्यशाली, आदर्शवादी व कभी न हारनेवाला और बड़े -बड़े
कार्य करके सब को सम्मोहित करनेवाला होता है ।
ऐसे जातक को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता और दिशाबली होकर पुर्वजन्म के पुण्य कर्मो से अपने भाग्य भाव दृष्ट करता है । यदि निर्बली बृहस्पति जातक को आडमंबर रचनेवाला व ज्यादा बाते करनेवाला, उत्साह व ऊर्जा की पाई जाती है ।
-- ऐसे जातक को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता और दिशाबली होकर पुर्वजन्म के पुण्य कर्मो से अपने भाग्य भाव दृष्ट करता है । यदि निर्बली बृहस्पति जातक को आडमंबर रचनेवाला व ज्यादा बाते करनेवाला, उत्साह व ऊर्जा की पाई जाती है ।

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