नौ ग्रह का वर्णन
सूर्य
:- सूर्य भगवान हम सब की आत्मा के संचालक है यदि वह समय पर उदय न हो तो
सुप्रभात नही होती है । वही पालक है वही देव, तेज, बल, जीवन और शक्ति के
दाता है । ग्रहों के राजा और पिता है । फलित ज्येतिष में भगवान देव
महत्वपूर्ण स्थान है ।
सब ग्रहो के पिता है यह जीव कुण्डली में पिता, आत्मा,नेत्र,सत्वगुण प्रधान व पित-प्रकृति, पराक्रम व शासन संबन्धित कार्य के कारक है ।
चन्द्रमा :- चन्द्रमा हमारे मन का कारक है । चन्द्रमा हमारे मन,
बुद्धि,माता का और धन का भी कारक है। सूर्य के बाद चन्द्रमा का स्थान है ।
चन्द्रमा की गति सबसे अधिक तीव्र ग्रह है । यह एक राशि को लगभग सवा दो दिनो
में पूरा करता है । मन के सब संकल्प - विकल्प का
प्रतिनिधित्व भी चन्द्रमा ही करता है । ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा का
विचार ज्योतिष विधा में रूचि,यात्रा, सम्पति, राज्य कृपा, चावल,,श्वेत, दूध, वस्त्रादि इसी से देखे जाते है। गोल चहेरा, सुंदर नेत्र और वात-कफ,श्वेत रग, वैश्व जाति, जल-तत्व,मधुर वाणी और पश्चिम दिशा का (वायव्य ) का स्वामी है ।
मंगल :-
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मंगल साहस और कठिन कार्य करने का प्रतीक है एक पुरुष ग्रह है ।यह लाल रंग और दक्षिण दिशा का स्वामी, अग्नि तत्व ,पित-प्रकृति का स्वामी है और बली मंगल वाले जातक, विशेषकर ऐसे जातक जिनके लग्न में चन्द्र राशि में मंगल स्थित हो उनके अन्दर भय नाम की चीज नहीं होती है| यह तमोगुणी,युवावस्थावाला,साहसी,अति चपल, उग्रस्वभाव,क्षत्रीय जाति, रात्रिबली, पापग्रह और जातक आकृति,चतुष्कोण, मध्य आकार एवं पुष्टअंग वाला होता है । यह मेष और वृशिचक राशि का स्वामी है । मकर में उच्च का और कर्क राशि में नीच का होता है । मंगल
मंगल छोटे भैइयो, भूमि, सेना और शुत्र का कारक है और साहस,धातु ,क्रोध,पित -विकार,
आप्रेशन, पुत्र व सन्तान पर देखा जाता है उदाहरण के बापू गांधी जी की जन्मकुंडली देखने से पता लगाया जा सकता है उनका जन्म नक्षत्र चित्रा था लग्नेश शुक्र, मंगल साथ के युति कर लग्न में स्थित है उनमें ऊर्जा शक्ति भरपूर थी जिसके कारण वह जीवन में कभी भी किसी क्षैत्र में पराजित नहीं हुए ।
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