सूर्य भगवान हम सब की आत्मा के संचालक है यदि वह समय पर उदय न हो तो
सुप्रभात नही होती है । वही पालक है वही देव, तेज, बल, जीवन और शक्ति के
दाता है । ग्रहों के राजा और पिता है । फलित ज्येतिष में भगवान देव
महत्वपूर्ण स्थान है ।
सब ग्रहो के पिता है यह जीव कुण्डली में पिता, आत्मा,नेत्र,सत्वगुण प्रधान व पित-प्रकृति, पराक्रम व शासन संबन्धित कार्य के कारक है ।
सब ग्रहो के पिता है यह जीव कुण्डली में पिता, आत्मा,नेत्र,सत्वगुण प्रधान व पित-प्रकृति, पराक्रम व शासन संबन्धित कार्य के कारक है ।

No comments:
Post a Comment