Tuesday, 6 January 2015

मंगल

   मंगल साहस और कठिन कार्य करने का प्रतीक है एक पुरुष ग्रह है ।यह लाल रंग और दक्षिण दिशा का स्वामी, अग्नि तत्व ,पित-प्रकृति का स्वामी है और बली मंगल वाले जातक, विशेषकर ऐसे जातक जिनके लग्न में चन्द्र राशि में मंगल स्थित हो उनके अन्दर भय नाम की चीज नहीं होती है| यह तमोगुणी,युवावस्थावाला,साहसी,अति चपल, उग्रस्वभाव,क्षत्रीय जाति, रात्रिबली, पापग्रह और जातक आकृति,चतुष्कोण, मध्य आकार एवं पुष्टअंग वाला होता है । यह मेष और वृशिचक राशि का स्वामी है । मकर में उच्च का और कर्क राशि में नीच का होता है ।    मंगल मंगल छोटे भैइयो, भूमि, सेना और शुत्र का कारक है और साहस,धातु ,क्रोध,पित -विकार, आप्रेशन, पुत्र व सन्तान पर देखा जाता
है उदाहरण के बापू गांधी जी की जन्मकुंडली देखने से पता लगाया जा सकता है उनका जन्म नक्षत्र चित्रा था लग्नेश शुक्र, मंगल साथ के युति कर लग्न में स्थित है उनमें ऊर्जा शक्ति भरपूर थी जिसके कारण वह जीवन  में कभी भी किसी क्षैत्र में पराजित नहीं हुए ।

             मंगल  यदि निर्बल होतो वह तनाव, झगड़े व विनाशकारी होता है । जातक डरपोक और दूसरे का कहा मानने वाला होता है । कानून का विरोध करनेवाला, दुर्घटनाओ का भय बना रहता है

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